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फाइलेरिया उन्मूलन की दिशा में यूपी की नई पहल, अब ‘नेवर टेकन’ तक पहुंचने पर जोर

•    फ्रंटलाइन वर्कर व पीएसपी सदस्य कर रहे नुक्कड़ नाटक के माध्यम से जागरूक, सामने आए कई कभी न दवा खाने वाले लोग  
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फाइलेरिया उन्मूलन की दिशा में यूपी की नई पहल
उत्तर प्रदेश  को फाइलेरिया मुक्त बनाने के लक्ष्य के मद्देनजर अब फोकस उन लोगों पर है, जो अब तक सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) अभियान से दूर रहे हैं।

•    आशा कार्यकर्ता घर-घर पहुंचकर कर रहीं पहचान व दवा सेवन के लिए प्रेरित
•    जमीनी स्तर पर व्यवहार परिवर्तन की दिख रही नई राह

लखनऊ। उत्तर प्रदेश  को फाइलेरिया मुक्त बनाने के लक्ष्य के मद्देनजर अब फोकस उन लोगों पर है, जो अब तक सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) अभियान से दूर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की रणनीति में इस बार ‘नेवर टेकन’ (कभी न दवा खाने वाले) श्रेणी के लोगों की पहचान और उन्हें फाइलेरिया रोधी दवा खिलाने पर विशेष जोर है। यह पहल अभियान को केवल दवा सेवन तक सीमित रखने के बजाय समुदाय के व्यवहार में बदलाव लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

घर-घर पहुंचकर खोजे जा रहे दवा से दूर रहे लोग

प्रदेश के 16 जिलों के 53 प्लानिग यूनिट (पीयू) में एमडीए अभियान 19 नवंबर से 7 दिसंबर के बीच आयोजित होगा। जमीनी स्तर पर फाइलेरिया उन्मूलन की सबसे बड़ी चुनौती उन लोगों तक पहुंचना है, जो जागरूकता की कमी, दवा को लेकर आशंका या गलत धारणाओं के कारण अब तक दवा नहीं ले पाए हैं। कुछ लोगों को यह जानकारी नहीं होती कि फाइलेरिया जैसी बीमारी लंबे समय में गंभीर शारीरिक परेशानी और दिव्यांगता का कारण बन सकती है। वहीं, कुछ लोग स्वस्थ महसूस करने के कारण दवा सेवन को जरूरी नहीं समझते।
ऐसे में आशा कार्यकर्ताओं और अन्य अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कर्मियों की भूमिका अहम हो जाती है। घर-घर संपर्क के दौरान परिवारों से यह जानने का प्रयास किया जा रहा है कि उन्होंने पहले फाइलेरिया रोधी दवा ली है या नहीं। इससे उन पात्र लोगों को चिह्नित करने में मदद मिल रही है, जो पिछले अभियानों में लगातार छूटते रहे हैं।

संवाद से दूर हो रहीं भ्रांतियां

फाइलेरिया के खिलाफ इस अभियान में दवा देने के साथ-साथ लोगों को समझाना भी जरूरी है। रोगी हितधारक मंच (पीएसपी) के सदस्य नुक्कड़ नाटक का आयोजन कर परिवारों को बीमारी के खतरे, बचाव और निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार दवा सेवन के महत्व के बारे में समझा रहे हैं। इससे ‘नेवर टेकन’ व्यक्तियों व इनकार करने वालों को अपनी आशंकाओं पर खुलकर चर्चा करने का अवसर मिल रहा है और वे 19 नवंबर से शुरू होने जा रहे एमडीए अभियान में दवा खाने के लिए तैयार हो गए हैं। कानपुर के बिधनू ब्लाक के छह गांव में बीते सप्ताह हुए नुक्कड़ नाटक के मंचन के बाद कई ‘नेवर टेकन’ लोग सामने आए और उन्होंने आगामी एमडीए अभियान में दवा खाने की शपथ ली। रामईपुर गांव की रामश्री ने बताया कि नुक्कड़ नाटक देखने के बाद दवा का महत्व समझाया। अब वे खुद दवा खाएंगी, अपने परिवार को खिलाएंगी और पड़ोसियों को भी प्रेरित करेंगी। मगरासा की शांति ने पहले एक बार दवा खाने पर जी मिचलने और चक्कर आने के कारण दोबारा दवा न खाने का मन बना लिया था लेकिन नाटक देखने के बाद उन्हें सही बात समझ में आई और अब वे खुद भी दवा खाएंगी और बच्चों को भी खिलाएंगी।
 

‘नेवर टेकन’ लोगों का चिंहिकरण व दवा सेवन जरूरी 

राज्य फाइलेरिया अधिकारी डॉ एके चौधरी के अनुसार एमडीए अभियान की तैयारी पूरी कर ली गई है। सभी 16 जिलों में दवा पहुंच गई है। अंतरविभागीय समन्यवय के लिए माध्यमिक व प्राथमिक विभाग और उत्तर प्रदेश राज्य़ ग्रामीण आजीविका मिशन (यूपीएसआरएलएम) के अधिकारियों-कर्मचारियों का प्रशिक्षण हो चुका है। इसी सप्ताह पंचायतीराज विभाग के साथ भी प्रशिक्षण प्रस्तावित है। गुरुवार को केंद्रीय स्वास्थ्य टीम ने भी एक-एक करके सभी 16 जिलों के अधिकारियों के साथ तैयारियों का जायजा लिया। 
उन्होंने बताया कि इस बार प्रत्येक प्लानिंग यूनिट में 90 प्रतिशत से अधिक लोगों को अपने सामने दवा खिलाने का लक्ष्य है। इसमें ‘नेवर टेकन’ और इनकार करने वाले लोगों की पहचान, उनकी पात्रता के अनुरूप दवा सेवन, छूटे लोगों का फॉलोअप और समुदाय की भागीदारी पर ध्यान देना आवश्यक है।

इन जिलों में होना है एमडीए

कानपुर नगर, उन्नाव, कानपुर देहात, चित्रकूट, सीतापुर, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, श्रावस्ती, प्रयागराज, गोण्डा, हरदोई, कन्नौज, बलिया, फर्रुखाबाद, फतेहपुर व कौशांबी के 53 प्लानिंग यूनिट (पीयू) में एमडीए अभियान होना है। सबसे ज्यादा फतेहपुर में 11 पीयू, उसके बाद सीतापुर में 10 व कानपुर देहात में सात पीयू हैं।